Mera Kuchha Samaan – Gulzar
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Description
बहुत छोटी-छोटी बातें होती हैं- रोटी, तवा, धुआं, पट्टी, कोहरा या पानी की एक बूंद ! लेकिन, उनके बडेपन की तरफ कोई हमें ले जाता है, तो हम अनायास ही एक ताल से ऊपर उठ जाते हैं, नितांत निर्मल होते हुए! गुलज़ार की शायरी इसी निर्मलता की तलाश की एक शीश जान पड़ती है ! वे बहुत मामूली चीजों में बहुत खास तरह से अभिव्यक्त होते हैं ! उदासी, ख़ुशी या मिलन-बिछोह अथवा बचपन… लगभग सभी नितांत निजी इन स्पर्शों को वे शब्दों के जरिये मन से मन में स्थान्तरित करने की क्षमता रखते हैं ! एक विशेष प्रकार की सूमनियत के बावजूद ये विराग में जाकर अपना उत्कर्ष पते हैं ! इसलिए उदास भी होते हैं तो अगरबत्ती की तरह ताकि जलें तो भी एक खुशबू दे सकें औरों के लिए ! गुलज़ार की यह साडी मोलिकता और अपनापन इसलिए भी और-और महत्त्वपूर्ण जन पड़त है क्योंकि वे अपनी संवेदनशीलता और शब्द फिल्मो में लेकर आए हैं ! बेशुमार दोलत और शोहरत की व्यवसाहिक चकाचोंध में जहाँ लोकप्रियता का अपना पैमाना है, वहां साहित्य की संवेदनात्मक, मार्मिक तथा मानव ह्रदय से जुड़े हर्ष-विषाद की जैसे काव्यात्मक अभिव्यक्ति गुलज़ार के हाथों हुई, वह अपने आप में एक अविद्तियता का प्रतीक बन गई है !
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